शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति माध्यामिक विघालय के शिक्षकों की अभिवृŸिा  - एक अध्ययन

 

श्रीमती रिया तिवारी

सहा. प्रा. अध्यापक शिक्षा संस्थान, पं. रविशंकर शुक्ल वि.वि. रायपुर

Abstract

शिक्षा वह प्रकिया है, जिसके द्वारा ज्ञाान की प्रात्ति होती है । शिक्षा के द्वारा मनुष्य समायोजन को सीखता है, प्रस्तुत शोध में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति माध्यमिक विघालय के शिक्षकांे की अभिवृा का अध्ययन किया गया । यह अध्ययन शासकीय एवं अशासाकीय माध्यमिक विघालयों में किया गया है । प्रस्तुत अध्ययन में सर्वे विधि का प्रयोग किया गया है । तथा स्वनिर्मित प्रश्नावली का उपयोग किया गया है। स्तरीकृत एवं यादृक्षिक विधि के द्वारा न्यादर्श का चयन किया गया है । आँकडों के विश्लेषण से पाया गया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रति अशासकीय माध्यमिक विघालय के शिक्षा शासकीय माध्यमिक विघाालय के शिक्षकों की अपेक्षा नकारात्मक अभिवृा दर्शाते है । 

 

प्रस्तावना -

शिक्षा का प्रथम सोपान प्राथमिक शिक्षा से प्रारंभ होता हैं । शिक्षा मानव को चुनौति पूर्ण परिस्थितियों में भी सुखद जीवन व्यतीत करने योग्य बनाती हंै । आजादी को बाद देश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अनेक योजनाऐं चलाई गई हैं । इन योजनाओं का मकसद शिक्षा का व्यापक प्रचार -प्रसार करना हैं । परंतु इन योजनाओं के बावजूद शिक्षा से वंचित बच्चों में खास सुधार नहीं आया हैं । फलस्वरूप अनपढो़ की बढ़ती तादाद देश के सामने बडी़ चुनौति बनकर खड़ी हो गई हैं । इस चुनौती से निबटने के लिए सरकार ने “ शिक्षा का अधिकार ” कानून बनाया हैं ।

 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम - 

शिक्षा का अधिकार वह मौलिक अधिकार है, जो प्रत्येक बच्चे को निःशुक्ल एवं अनिवार्य बाल शिक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया हैं। इसें शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के नाम से जाना जाता हैं । अनिवार्य शिक्षा का आशय 6 से 14 आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चें को निःशुल्क प्रांरिभक शिक्षा प्रदान करने तथा अनिवार्य दाखिले, उपस्थिति एवं प्रारंभिक शिक्षा की पूर्णतः उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त संरचना उपलब्ध करने की सरकार की बाध्यता से हैं । इस अधिनियम के तहत सभी निजी स्कूलों को अपनी कुल क्षमता के 25 प्रतिशत में कमजोर तथा असुविधा ग्रस्त वर्ग के बच्चों को दाखिला देना पडेंगा । इस कानून के तहत कोई की बच्चा साल में किसी भी समय दाखिले की मांग कर सकता हैं । इस तरह के इस अधिनियम के तहत कई प्रावधान दिये गये हैं ।

 

अभिवृति -

आलर्पोर्ट (1967) के अनुसार अपने वातावरण के कुछ पक्षों के प्रति व्यक्ति के नियंत्रित भाव -विचार और कार्य करने के पूर्व वृति ही अभिवृŸिा हैं ।

 

 अभिवृŸिा के प्रकार - 

अभिवृŸिा तीन प्रकार की होती हैं, जब किसी भी संबंधित समूह के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण पाया जाता हैं, तब धनात्मक अभिवृŸिा होती हैं। नकारात्मक दृष्टिकोण ऋणात्मक अभिवृŸिा से संबधित होता हैं । एवं किसी की प्रकार की अभिवृŸिा किसी व्यक्ति समूह या घटना के प्रति न होना शून्य अभिवृŸिा कहलाता हैं।

 

अध्ययन का महत्व -

सरकार ने प्राथमिक शिक्षा सभी को उपलब्ध कराने के लिए अनेक बार प्रयास किये । परंतु पूर्णरूप से सफल नहीं हो सका । इस अध्ययन के द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति माध्यमिक शिक्षकों की अभिवृŸिा को जान पायेगें । तथा शिक्षक शिक्षा पद्धति और इस अधिनियम के तहत क्या सोच रखते हैं। उसे समझ पायेगें ।  

 

समस्या का कथन -

शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रति माध्यमिक विधालयों के शिक्षकों की अभिवृŸिा  एक अध्ययन

 

अध्ययन के उद्देश्य - 

प्रस्तुत शोध अध्ययन के निम्न उद्देश्य है-

1. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के शिक्षकों की अभिवृŸिा का अध्ययन करना ।

2. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशासकीय विघालयों के पुरूष शिक्षकों की अभिवृŸिा का अध्यय करना ।

3. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के महिला शिक्षकों की अभिवृŸिा का अध्ययन करना ।

 

अध्ययन की परिकल्पना -

प्रस्तुत शोध अध्ययन के लिए निम्न परिकल्पनाओं का निर्माण किया गया हैं-

भ्1. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के शिक्षकोें की अभिवृŸिा में सार्थक अंतर पाया जायेगा ।

 भ्2. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशासकीय विघालयों के पुरूष शिक्षकों की अभिवृŸिा में सार्थक अंतर पाया जायेगा ।

भ्3. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशासकीय विघालयों के महिला शिक्षकों की अभिवृŸिा में सार्थक अंतर पाया जायेगा ।

 

शोध विधि -

प्रस्तुत शोध अध्ययन के लिए सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया हैं ।

 

 

जनसंख्या एवं न्यादर्श -

उपलब्ध साधनों एवं समय को ध्यान में रखते हुऐ शोधकर्Ÿाा के द्वारा जनसंख्या के रूप मंें कांकेर जिले के शासकीय एवं अशासकीय विघालयांे के शिक्षको को सम्मिलित किया गया हैं । एवं उद्देश्य पूर्ण यादृक्षिक विधि द्वारा न्यादर्श का चयन किया गया हैं ।

                     

 

शोध उपकरण -

शोध उपकरण के रूप में आंकडों को एकत्रित करने के लिए स्वनिर्मित प्रश्नावली ”शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति माध्यमिक विघालयों के शिक्षकों की अभिवृŸिा मापनी“ का प्रयोग किया गया । जिसमें कुल 50 प्रश्न हैैं, जिनका उतर हाँ या नहीं में देना था । यह प्रश्न शिक्षा का अधिकार अधिनियम के विभिन्न प्रस्तावों एवं उल्लेखों के आधार पर बनाऐ गऐ हैं ।

 

विश्लेषण -

परिकल्पनाओं की पुष्टि करने हेतु संकलित किये गये आंकडो़ का सांख्यिकी विधि से विश्लेषण किया गया। प्रदŸाों को सुव्यवस्थित किया जाना आवश्यक है, जिसमें निष्कर्षो की व्याख्या आसानी से की जा   सकें ।

भ्1. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के शिक्षकांें की अभिवृŸिा में सार्थक अंतर पाया जायेगा ।

उपर्युक्त परिकल्पना की सत्यता की जांच के लिए शोधकर्Ÿाा ने शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के आंकडों के मध्यमान एवं प्रामाणिक विचलन ज्ञात कर दोनांे चरोें के मध्य ”ज“ परीक्षण द्वारा सार्थकता की जाँच की गई ।

 

सारणी क्रमांक - 1

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के शिक्षकों की अभिवृŸिा

संस्थान       प्रदतोें की संख्या     मध्यमान      प्रमाणिक विचलन      ”ज“

शासकीय      60    17.13  2.81   3.67

अशासकीय     60    14.67  3.35  

क ित्र 118

उपरोक्त तालिका में ”ज“ का गणना द्वारा प्रात्त मूल्य 3.67 टेबल मूल्य त्र1.98 से अधिक हैं ।

 

व्याख्या -

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शसकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के शिक्षकों की अभिवृŸिा में 0.05 एवं 0.01 दोनों ही विश्वसनीयता स्तर पर सार्थक अंतर पाया गया । अतः परिकल्पना स्वीकृत होती हैं ।

 

भ्2ण् शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशाकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के पुरूष शिक्षकों की अभिवृŸिा में अंतर पाया जायेगा ।

 

उपर्युक्त परिकल्पना की सत्यता की जाँच के लिए शोधकर्Ÿाा ने शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के पुरूष शिक्षकों की अभिवृŸिा का मापन किया । प्रात्त आंकडों द्वारा मध्यमान, प्रमाणिक विचलन ज्ञात कर दोनों चरों के प्रमाणिक विचलन के मध्य ”ज“ मान द्वारा सार्थकता की जाँच की गई, जिसका विवरण अग्र सारणी में प्रदर्शित हैं ।

                                       

 

 

 

सारणी क्रमांक - 2  

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के पुरूष शिक्षकों की अभिवृŸिा

संस्थान       लिंग   प्रदतों की संख्या       मध्यमान      प्रमाणिक विचलन      ”ज“ टी मूल्य

शासकीय      पुरूष   30    16.43  2.94   2.79

अशासकीय     पुरूष   30    14.53  2.25  

क ित्र 58

 

 

 

व्याख्या -

उपरोक्त सारणी के अनुसार ”ज“ का गणना द्वारा प्रात्त मूल्य 2.79, टेबल मूल्य सं अधिक हैं ।

 

2.79 झ 2.66 अतः 0.01 विश्वसनीयता स्तर पर शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के पुरूष शिक्षकेां की अभिवृŸिा में सार्थक अंतर पाया गया । एवं परिकल्पना भ्2 स्वीकृत हुई ।

 

भ्3. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों की महिला शिक्षकों की अभिवृŸिा में सार्थक अंतर पाया जायेगा ।

शोधकर्Ÿाा ने भ्3 की पुष्टि के लिए शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों की महिला शिक्षकों से आंकडें एक़ि़त्रत किये एवं सत्यता का जाँच करने के लिए मध्यमान , प्रमाणिक विचलन एवं ”ज“ मूल्य की गणना की गई ।

 

 

 

सारणी क्रमांक - 3 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों की महिला शिक्षकों की अभिवृŸिा

संस्थान       लिंग   प्रदतों की संख्या       मध्यमान      प्रमाणिक विचलन      ”ज“ टी मूल्य

शासकीय      महिला 30    17.83  2.48   5.31

अशासकीय     महिला 30    14.8   2.09  

 

 

 

व्याख्या -

उपरोक्त सारणी के मानो के अनुसार ”ज“ 2 का टेबल मूल्य गणना मूल्य से कम हैं । 5.31 झ2.00, अतः अभिवृŸिा में सार्थक अंतर हैं । भ्3 स्वीकृत हुई ।

 

निष्कर्ष -

तीनांे परिकल्पनाओं के सांख्यिकी विश्लेषण से निम्न निष्कर्ष सामने आऐ -

1. शासकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विघालयों के शिक्षकों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम को लेकर अभिवृŸिा में अंतर हैं। अशासकीय माध्यमिक विघालय के शिक्षक इस अधिनियम के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं दर्शाते हैं।

 

2. इसी प्रकार महिला एवं पुरूष शिक्षकांे की अभिवृŸिा का भी जब अलग-अलग मापन किया गया तो पाया गया कि अशासकीय विघालय के पुरूष शिक्षक का भी दृष्टिकोण नकारात्मक हैं ।

 

3. महिला शिक्षकोें मेें की शासकीय विघालयों की महिला शिक्षिकाऐं सकारात्मक अभिवृति दर्शाती हैं । एवं अशासकीय महिला शिक्षकों की अभिवृŸिा नकारात्मक हैं ।

 

अंततः यह कहा जा सकता हैं, कि शासकीय विघालय के शिक्षक अशासकीय विघालयों के शिक्षकों की अपेक्षा इस अधिनियम के प्रति ज्यादा सकारात्मक अभिवृŸिा रखतें हैं ।

अतः यह कहा जा सकता हैं । कि अशासकीय विघालय के शिक्षकों को इस अधिनियम के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता हैं ।

 

सुझाव -

प्रस्तुत शोध के निष्कर्ष के आधार पर निम्न सुझाव शिक्षकों को दिये जा सकतें हैं -

1. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति शिक्षक सकारात्मक सोच अपनाऐ ।

 

2. इस अधिनियम के लिए प्रशिक्षण प्रात्त करंे ।

3. इस अधिनियम के क्रियान्वयन में सम्पूर्ण रूचि लें एवं अधिनियम के लक्ष्यों को प्रात्त करने का प्रयास करें ।

 

त्म्थ्म्त्म्छब्म्रू

1) अग्रवाल जे.सी. - शैक्षिक तकनीकी एवं प्रबंधन के आधार (अग्रवाल पब्लिकेशन) आगरा

2) कुलश्रेष्ठ एस. के - शैक्षिक तकनीकी के मूल आधार, रस्तोगी पब्लिेकशन

3) कपिल एच .के  अनुसंधान विधियों, आगरा, हस्तपुस्तक भार्गव पुस्तक प्रकाशन, 4/230 कचहरीघाट

4) शर्मा एवं शर्मा मनोविज्ञान, समाजशास्त्र तथा शिक्षा में सांख्यिकी ताराभवन पाटन

 

 

 

Received on 06.08.2016       Modified on 21.09.2016

Accepted on 28.09.2016      © A&V Publication all right reserved

Int. J. Ad. Social Sciences 4(3): July- Sept., 2016; Page 164-168.